देश में समान आचार संहिता लागू करने की दिशा में कदम 
 ( कविलाश मिश्र)। देश में समान आचार संहिता लागू हो सकता हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मोदी सरकार के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में गर्माहट आना तय मान जा रहा है। इस संबंध में मोदी सरकार ने विधि आयोग से देश में समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने की स्थिति में उसके निहितार्थों की जांच करने के लिए कहा है।  सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल समान आचार संहिता पर कानून बनाने के लिए केंद्र और संसद को निर्देश देने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। दिल्ली के एक भाजपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी। भाजपा नेता ने मुस्लिम महिलाओं के साथ कथित भेदभाव का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वह इस बारे में संसद को कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता। 
  देश में समान आचार संहिता की बात आज से नहीं हो रही हैं। केंद्र सरकार भी जानती हैं कि देश हित में एक ऐसा मुद़दा हैं जिसपर छदम धर्मनिरपेक्ष दल हायतौबा करेंगे। लेकिन, ऐसा होने से देश के सभी समुदाय के लोगों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में पर्सनल कानून होने से एक धर्म विशेष के लोगों को खासकर महिलाओं के साथ दोहरा व्‍यवहार अपनाया जाता हैं। बताया जाता हैं कि देश के संविधान निर्माताओं ने उस वक्‍त एक समान आचार संहित की बात की थी लेकिन कांग्रेस के तत्‍कालीन वरिष्‍ठ नेताओं ने इसका विरोध किया था जो बाद में वोट बैंक की फसल काटने में तब्‍दीन हुआ हैं। 
 समान नागरिकता कानून का अर्थ भारत के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक (सिविल) कानून (विधि) से है। समान नागरिक संहिता एक सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) कानून होता है जो सभी धर्मों के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही 'समान नागरिक संहिता' का मूल भावना है। समान नागरिक कानून से अभिप्राय कानूनों के वैसे समूह से है जो देश के समस्त नागरिकों (चाहे वह किसी धर्म या क्षेत्र से संबंधित हों) पर लागू होता है। यह किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है। ऐसे कानून विश्व के अधिकतर आधुनिक देशों में लागू हैं।
   समझा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के इस कदम से राजनीतिक विवाद शुरू होगा क्योंकि देश में समान आचार संहिता लागू करने को लेकर राजनीतिक पार्टियां एकमत नहीं हैं। समान आचार संहिता पर राजनीतिक दलों के अपने-अपने तर्क हैं। संसद समान आचार संहिता विधेयक को यदि पारित कर देती है तो देश भर में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। वर्तमान में हिंदू और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग पर्सनल कानून हैं। पर्सनल कानून के दायरे में संपत्ति, शादी, तलाक और उत्तराधिकारी जैसे विषय आते हैं।

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