41 साल में 100 से 50000





                                               संसेक्‍स 41 साल में 100 से 50000
कवि‍लाश मि‍श्र
सुबह 9 बजकर 24 मिनट पर भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स ने 50000 के ऐतिहासिक ऊंचाई को छू लिया। देश के स्टॉक एक्सचेंज के इतिहास में पहली बार ये मुकाम आया है। यह मानक एक प्रकार से बताता है कि‍ भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में आने वाले समय में और भी गति‍ देखने को मि‍ल सकती है। कारोना काल में लाक डाउन की घोषणा के बाद सेंसेक्‍स मार्च-2020 में अपने लाइफ टाइम हाई 42000 हजार से करीब 25000 के नि‍चले स्‍तर पर आ गया था। विश्व स्वास्थ संगठन ने कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। इसके चलते अमेरिका समेत दुनिया भर के शेयर बाजार धराशायी हो गए। लेकि‍नपूरी दुनि‍यां की अर्थ-व्‍यवस्‍था पटरी पर लौट रही है। अमेरि‍का को नए राष्‍ट्रपति‍ जो बाइडन से काफी उम्‍मीदें है। इसके अतिरि‍क्‍त दुनि‍यां भर में बैंकि‍ग ब्‍याज दरों में कमी आने से लोग रोजगार के लि‍ए प्रोत्‍साहि‍त हो रहें हैं। नि‍वेश के लि‍ए उन्‍हें शेयर बाजार अभी बेहतर लग रहा है।
बम्‍बई शेयर बाजार ने 1986  में संसेटि‍व इनडेक्‍स की रचना की थी जि‍सका बाद में नाम सेंसेक्‍स हो गया। यह भारत का एक मूल्य-भारित सूचकांक है। इसकी गणणा 30 कंपनि‍यों के स्‍टाक के आधार पर की जाती है। समय समय में स्‍टाक बदले भी जाते है। इसका आधार वर्ष 1978-79 रखा गया था जि‍सका मूल्‍य 100 रूपये रखा गया था। अर्थातजि‍सने भी 100 में बीएसइ-30 का एक स्‍टाक खरीदा होगाआज उसका मूल्‍य 50000 के करीब है। संवेदी सूचकांक के 30 शेयर बीएसई के कुल पूंजीकरण का लगभग 15वां हिस्सा है। बीएसई में 4700 से अधिक कंपनियां सूचीबध्द हैं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार बनाती हैं।
 सेंसेक्स ने 1986 से एक लंबी यात्रा तय की है। कारोबार के पहले दिन अप्रैल 1986 को सेंसेक्स करीब 549 अंक पर बंद हुआ था। आइटीसीएचयूएल, महेंद्रा एंड महेंद्राएल एंड टीआरइएल व नेस्‍लेये वा छह कंपनि‍यां हैं जो 1986 से अभी तक बीएसइ-30 का हि‍स्‍सा हैं। 1986 के बीएसइ-30 के मूल सूचकांक में कई ऐसी कंपनि‍या हैं जि‍नके बारे में अब न के बराबर सूना जाता है। इनमें बल्लारपुर इंडस्ट्रीजसेंचुरी स्पीनिंगग्रेट इस्टर्न शिपिंगजीएसएफसीमुकंद पीस इलेक्ट्रानिक्स, प्रीमियर ऑटोमोबाइल शामिल हैं।
सूचकांक का अध्‍ययन करें तो यह भी देखने को मि‍लता हैं कि‍ वर्तमान में भारतीय उद्योग क्षेत्र ने जो नया आयाम प्राप्त किया है उससे उसकी परिवर्तित स्थिति का स्पष्ट संकेत मिलता है। भारत की तीन बड़ी आईटी कंपि‍नयां  टीसीएस,  इंफोसिस  और एचसीएल की उपस्थिति से सूचना प्रौद्योगिकी जगत में उसकी पहले से पहुंच रेखांकित होता है। विनिवेश नीति के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र की पांच कंपनियों के प्रवेश ने छिपी संपदा को सबके सामने रख दिया है। फाइनेंस व बैंकि‍ग सेंक्‍टर काफी तेजी से बढ़ा है। रिटेल व फूड बाजार ने व्‍यवसाय के नए आयाम खोले है। अतीत और वर्तमान कीसेंसेक्स कंपनियों पर सरसरी तौर पर निगाह डालने से भारतीय अर्थव्यवस्था के सूर्योदय और सूर्यास्त क्षेत्रों का स्पष्ट चित्र देखने को मिलता है।
बीएसइ के संवेदी सूचकांक को 100 से 1000 अंक पहुंचने में 11 लगे। बीएसइ ने 25 जुलाई, 1990 को 1000 का पड़ाव तय किया लेकि‍न 1000 से 4000 तक का सफर इसने 20 माह में ही कर लिया। हालांकिबाद में शेयर बाजार और बैंकि‍ग सेक्‍टर के कुछ के खामि‍यों के कारण हर्षद मेहता घोटाला प्रकरण आया। बाजार धाराशाही हो गया। नि‍वेशकों का वि‍श्‍वास बाजार से उठने लगा। परि‍णामस्‍वरूप 4000 से 5000 तक पहुंचने में सेंसेक्स को साढ़े सात साल लग गए थे। 11, अक्टूबर 1999 को इसने 5000 का आंकड़ा छुआ था। इस दौरान कारोबारी नि‍यमों में कई परि‍वर्तन हुए।
वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी की अभूतपूर्व प्रगति के साथ.साथ सेंसेक्स 6000 अंक को पार कर गया। वर्ष 2006 के आसपास विदेशी निवेशक भी सक्रिय हो गए जिसके परिणामस्वरूप सितम्बर 2005 को सेंसेक्स 8000 अंक को पार कर गया। यह जनवरी 2008 को 21078 की ऊंचाई तक पहुंच गया। इसी बीच वैश्विक मंदी की प्रक्रिया शुरू हुई और विदेशी निवेशकों ने अपने निवेश को बेचना शुरू कर दिया। अमेरिका की सब-प्राइम संकट से पैदा हुई। मंदी ने शेयर बाजार को फिर से जमीन पर ला दिया। उसी साल 11 माह के अंदर 27 अक्टूबर को यह 63 फीसदी गिरकर 7697 तक आ गया। असमर्थ कर्जदारों को दिए गए अंधाधुंध कर्ज से पैदा हुए इस संकट से अमेरिका के कई बैंक बर्बाद हो गए थे। अमेरिका की वित्तीय फर्म लेमन ब्रदर्स के दिवालिया होने की खबर आने के साथ ही दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं में निराशा और बैचैनी पैदा हो गई। हाल यह हुआ कि मंदी से निबटने के लिए 2009 के बजट में केंद्र सरकार को अपने खर्च में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मांग बढ़ाने के लिए अपना वित्तीय घाटा 6.5 फीसदी तक बढ़ाने का ऐलान किया था।
भविष्य का अनुमान लगाना कभी भी आसान नहीं रहा। बाजार में किसी भी विश्लेषक से पूछकर देखिये। वे लगातार यह अनुमान लगाने में गलत साबित हुए हैं कि अगले दो वित्त वर्ष में निफ्टी की प्रति शेयर आय कितनी होगी। ग्लोबल लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर डीपी वर्ल्ड की ओर से कराए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि  70 प्रतिशत कारोबारी यह उम्मीद कर रहे हैं कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद रिकवरी में लगे वक्त की तुलना में तेजी से कारोबार महामारी के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगा। करीब एक तिहाई रिकवरी दोगुने से ज्यादा तेजी से होगी और एक साल के भीतर कारोबार महामारी के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगा। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की ओर से कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक आंकड़ों से पता चलता है कि महामारी के कारण कंपनियों के कारोबार करने के तरीके में बदलाव आया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने विगत दिनों अपनी आर्थिक पूर्वानुमान सेवा में जारी कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे से रोजगार के क्षेत्रवार आंकड़े जारी किए।
कृषि क्षेत्र के रोजगार पिछली तिमाही से भी बेहतर रहे और एक वर्ष पहले की समान अवधि की तुलना में भी बेहतर रहे। सितंबर 2020 में समाप्त तिमाही में कृषि क्षेत्र के रोजगार 15.8 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गए। जुलाई और अगस्त 2020 में 16 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए कृषि क्षेत्र के रोजगार उच्चतम स्तर पर रहे। देश के कुल रोजगारों में कृषि की हिस्सेदारी 36 फीसदी है। इन सबको देखते हुए यह कहां जा सकता हैं कि‍ अर्थ-व्‍यवस्‍था पटरी पर आएगी और कंपनि‍यां और बाजार का शि‍खर की  ओर अग्रसर होते रहेंगे।

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