दिल्लीवासियों के कठिन परिश्रम के करोड़ों  रूपये विभिन्न राज्यों में प्रचार में व्यर्थ 

नई दिल्ली, 
 दिल्लीवासियों की मेहनत की कमाई को तमिलनाडु, कर्नाटक, उड़ीसा, जम्मू और कश्मीर, गोवा इत्यादि जैसे दूरदराज के राज्यों में विज्ञापन देकर अपना निजी प्रचार करने के लिये मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कड़ी आलोचना हो रही है। केजरीवाल दिल्ली सरकार के फण्ड को वे अपने आपको अखिल भारतीय स्तर पर प्रोजेक्ट करने के लिये प्रयोग कर रहे हैं जो सरासर गलत है । भारत की राजधानी की सरकार दूसरे राज्यों में विभिन्न भाषाओं में विज्ञापन दे तो यह बात किसी भी दृष्टिकोण से न्यायोचित प्रतीत नहीं होती । दिल्ली की योजनाओं को बाहर के राज्यों में प्रोजेक्ट करने का लाभ मात्र केजरीवाल को निजी प्रचार के लिये तो मिल सकता है परंतु यह जनहित में कतई नहीं हो सकता ।  उन्होंने मुख्यमंत्री को परामर्श दिया कि वे दिल्ली आधारित समाचार पत्रों को छोड़कर विभिन्न राज्यों में विज्ञापन न दें तथा दिल्ली के विकास और कल्याण पर फोकस करें । 
  दूसरे राज्यों में विज्ञापन देना अपने आप में एक अजूबा है क्योंकि केजरीवाल सरकार से पहले किसी भी सरकार ने इस प्रकृति का प्रचार कार्य नहीं किया । दिल्ली सरकार का कराधान दिल्लीवासियों के  सहयोग से अर्जित किया जाता है और इसे दिल्ली में ही खर्च किया जाना उचित है । दिल्ली की योजनाओं को दिल्ली से बाहर प्रचारित और प्रसारित करने का कोई औचित्य नहीं बनता है । सूचना एवं प्रचार के लिये जितना भी फण्ड आवंटित किया जाय उसका शत-प्रतिशत दिल्ली में ही व्यय किया जाना चाहिये । इसे आप आपने आपको अखिल भारतीय स्तर पर महिमामंडित करने के लिये खर्च नहीं कर सकते । 

   सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार केजरीवाल सरकार ने 10 फरवरी से लेकर अब तक विभिन्न राज्यों में विभिन्न भाषाओं में लाखों रूपयों के विज्ञापन जारी किये । इनमें सम्मिलित हैं मलयालम मनोरमा ( 82.31 लाख ); थांटी तमिल समाचार पत्र ( 75.63 लाख ); दिनाकरण तमिल समाचार पत्र ( 65.33 लाख ); मातृभूमि मलयालम प्रकाशन ( 30.12 लाख ); कन्नड़ प्रभा कर्नाटक ( 15.82 लाख ); डेली एक्सेलसियर, जम्मू और कश्मीर ( 15.05 लाख ); उड़ीसा पोस्ट उड़ीसा ( 03.30 लाख ) नवहिन्द पेपर्स गोवा ( 03.87 लाख ); ग्रेटर जम्मू ( 03.77 लाख ) तथा केरल कमोदिनी ( 07.22 लाख ) इत्यादि । 

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